मेरी जिंदगी : पहिला दीन (Hindi)





हमेशा की तरह मैं आज सुबह जल्दी उठा और तैयार हो गया..मेरे बचपन के कुछ दोस्त आज दिवाली के लिए गाँव आए हैं इसलिए मैं उनसे मिलना चाहता था इसलिए मैंने तुरंत घर छोड़ने की योजना बनाई.... मैं भी कुछ साल पहले शिक्षा के लिए गाँव से दूर शहर में था लेकिन जब मैंने बीए स्नातक की पढ़ाई पूरी की तो गाँव में आगे की शिक्षा हासिल करने का फैसला किया और अब मैं गाँव के पास अर्थशास्त्र में एमए कर रहा हूँ .... मैंने कभी कहीं नौकरी पाने की दृष्टि से पढ़ाई नहीं की ... शिक्षा के प्रति मेरा दृष्टिकोण हमेशा ज्ञान प्राप्त करने और उसे रोजमर्रा की जिंदगी में लागू करने का रहा है ...शिक्षा लेकर
मेरी निजी राय है कि एक व्यक्ति को पढालिखा बेवकूफ बनणे के बजाय एक बुद्धिमान नागरिक होना चाहिए ..... मैंने अपने आस-पास ऐसे लोगों को देखा है जो बहुत अधिक शिक्षा के साथ बड़े हुए हैं और उच्च पदों पर काम कर रहे हैं, माञ उनमें नैतिकता बिल्कुल भी दिखाई नहीं देती है। मुझे लगता है कि एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है...वैसे भी...यह एक निजी बात है
 जब मैं घर की सीमा लांघता था तभी  गणेश घर आया.... हर सोमवार को गणेश मेरे पास आता हैं और फिर हम दोनों भगवान शंकर के मंदिर जाते हैं जो कि गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर स्तिथ हैं..... यह हमारा नित्यनियम है ..... मंदिर जाने के बाद एक चीज जो मुझे हमेशा महसूस होती है वह है शुद्ध शांति और सकारात्मक ऊर्जा, भगवान को प्रणाम करने से मन बहुत प्रसन्न हो जाता है।.....हमारे गांव के मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। मंदिर पूरी तरह से हेमंडपंथी है। मंदीर के परिसर मे चाफे की सुगंध चारों ओर फैलती है और सारा वातावरण सुगंधित हो जाता है, वह मजा ही कुछ और है।  मंदिर से घर आने के बाद, शहर से आया मेरा दोस्त संदीप बहुत दिनों बाद मुझसे मिलने आया और मिलते ही हमारी हार्दिक बातचीत शुरू हुई .... संदीप शुरू से ही एक बहुत ही साहसी व्यक्ति है, वह हमेशा नई चीजों को अजमाना पसंद करता है।
शेयर बाजार में भी उसे काफी ग्यान है। कुछ दिन पहले उसने  मुझे दो-तीन शेयर सुझाव किये थे मात्र समय पर खरिददारी न करणे की वजह से मुझे 500 रूपये का नुकसान झेलणा पडा, तब से मैंने तय किया है कि पहले मुझे खुद स्टॉक मार्केट का अच्छा ज्ञान प्राप्त करना चाहिए और फिर निवेश करना  चाहिए।धीरे-धीरे शेयर बाजार में कुछ चीजें अब मेरे ध्यान में आ रही हैं ...... अपने सभी दोस्तों से मिलने के बाद गेंदे के फूल लाने हेतू गाव मे गया और गेंदे के फूल लाकर अपनी मां को सौंप दिये और खेत चल बसा .... जब से हमने खेत में एक छोटा सा घर बांधा है। तब से मुझे गाँव में कोई खास दिलचस्पी नहीं है .... मेरा मन हमेशा खेतों में रहता है ..... दोस्तों मिलते है कल के एपिसोड में , तब तक के लिये खुश रहे मजे करिये नमस्कारम।

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